यीशु के जन्म की यादगार में क्रिसमस यानी ख्रीस्त जयंती सारी दुनिया में 25 दिसंबर को मनाई जाती है। यीशु का जन्म 2010 वर्ष पूर्व बेथलेहेम में हुआ था। यह क्षेत्र आजकल फलस्तीन में है।
ख्रीस्त जयंती को ईसाई भक्त की तरह मनाने के लिए इस धर्म के अनुयायी क्रिसमस के चार सप्ताह पहले से आध्यात्मिक तैयारी करते हैं। इन चार हफ्तों की अवधि को 'आगमन काल' कहते हैं। इसका उद्देश्य है स्वयं को यीशु के स्वागत के लायक बनाना। इन चार सप्ताहों में ईसाई श्रद्धालु गण विशेष प्रार्थना और मनन-चिंतन करते हैं।
ईसाई धर्म शास्त्रों में मसीहा के बारे में जो पुरानी व्यवस्था की गई थी, वे भविष्य वाणियां यीशु में पूरी हुईं, परंतु उस तरह से नहीं, जिस तरह उस समय के लोगों की अपेक्षा थी। लोगों का विचार था कि मसीहा सामर्थ्य और शक्ति के साथ आएंगे और वे एक शक्तिशाली राजा होंगे। वे न्याय के साथ राज्य करेंगे।
परंतु यीशु तो मानवीय परिस्थितियों को अपने ऊपर लेते हुए दीनता और निर्बलता के साथ आए। वे सामर्थ्य या शक्ति के बल पर नहीं, परंतु आत्मा की शक्ति में आए। प्रेम और क्षमा उनके शस्त्र थे। उनकी कार्य शैली प्रभुत्व की न होकर विनम्र सेवाभाव की थी। वे राजमहल में पैदा नहीं हुए, बल्कि उन्होंने चरनी में जन्म लिया - एक गुफा में जहां जानवर आराम करते थे।
सामर्थ्यवान ईश्वर एक कमजोर नन्हा बालक बन गया। प्रतापी ईश्वर पशुओं के बीच एक गुफा में जन्मा। एक ऐसे संसार में, जो बल और प्रभुता के लिए लालायित रहता है - अक्सर ऐसा समझा जाता है कि यहां के लोग अपने से ऊंचे लोगों के बराबर बनने की ही इच्छा रखते है, यीशु ने स्वयं को दीन-हीन लोगों के ही बराबर समझा।
यही ईश्वरत्व है। यीशु के रूप में वह ईश्वर मनुष्य बन गया ताकि हम सब ईश्वर के समान बन जाएं। इस प्रकार मनुष्य ईश्वर की प्रकृति में सहभागिता करता है। यही क्रिसमस का रहस्य और संदेश है।
ईश्वर जबर्दस्ती किसी के जीवन या हृदय में नहीं प्रवेश करता। वह हमें आमंत्रित करता है कि हम उसकी बातें सुनें, उसे स्वीकार करें और उसके साथ संबंध बनाएं। वह कहता है, सुनो, मैं तुम्हारे दरवाजे पर खड़ा होकर दरवाजा खटखटा रहा हूं। अगर हम उसकी आवाज सुनकर इस क्रिसमस पर दिल का दरवाजा खोलते हैं, तो नन्हें प्रभु यीशु हमारे हृदयों में अवश्य जन्म लेंगे।
हर वक्त , हर पल और हर जगह ईश्वर हमारे साथ है। पर हमें याद रखना है कि ईश्वर न केवल अपने भक्तजनों के ही साथहै , वह सब के साथ है। यीशु कहते थे , ' मैं गरीबों की मुस्कान में ईश्वर का दर्शन करता हूं। ' चाहे वे किसी भी प्रकार केलोग हों , सबको ईश्वर अपनी प्रेरणा से आगे बढ़ाता है , ताकि वे भी उसी के समान परमार्थी बन सकें।
सभी समाजों में , सभी समुदायों में परमार्थ कार्य करने वाले पाए जाते हैं। यही प्रमाणित करता है कि ईश्वर हमारे साथ है।
अमेरिका में लैरी स्टीवर्ट नाम का एक आदमी था। वह क्रिसमस पर भेष बदलकर वहां के शहरों और गांवों में घूमता थाऔर जरूरतमंदों को उनकी आवश्यकता के अनुसार पैसे देता था। जब उससे पूछा गया कि वह ऐसा क्यों करता है तोउसका जवाब था , हमें जो वरदान मिले हैं , उन्हें एक - दूसरे के साथ बांटना चाहिए। और यह ऐसा करने का एक तरीकाहै।
लैरी बहुत धनी व्यक्ति था पर वह अपने जीवन में यह कभी नहीं भूला कि भूखा और असहाय होने का अनुभव कैसा होताहै।
ईसा , जो कि असहाय और बेघर पैदा हुए थे , उनका जन्मदिन मनाने का बेहतर तरीका यही होगा कि हमारे पास जो कुछहै , उसमें से हम भी भूखे और जरूरतमंदों के साथ कुछ बां टें।
If you can dream IT, You can become it, If you can think IT, You can do IT,If you can believe it ,you can achieve IT.
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Friday, December 24, 2010
Wednesday, December 22, 2010
ITs My Style......................
Thursday, December 2, 2010
Khel Ratna, Arjuna Awards 2010
The National Sports Award’s committee, headed by legendary athlete PT Usha, has announced this year’s awardees.
Saina Nehwal, the top shuttler in India has been selected for the Rajiv Gandhi Khel Ratna Award for the year 2010. The world number 2 has been honoured with the country’s highest sports award after performing exceptionally in international arena. She won the Indian Open Grand Prix, the Singapore Open and the Indonesian Open back to back.
Saina, who won the Padma Awards last year, was the first Indian girl to reach the singles quarterfinals at the Olympics in Beijing. She is also the first Indian to win the World Junior Badminton Championships.
Saina Nehwal, the top shuttler in India has been selected for the Rajiv Gandhi Khel Ratna Award for the year 2010. The world number 2 has been honoured with the country’s highest sports award after performing exceptionally in international arena. She won the Indian Open Grand Prix, the Singapore Open and the Indonesian Open back to back.
Saina, who won the Padma Awards last year, was the first Indian girl to reach the singles quarterfinals at the Olympics in Beijing. She is also the first Indian to win the World Junior Badminton Championships.
Arjuna Awards 2010
Krishna Punia (athletics), Joseph Abraham (athletics), Dinesh Kumar (boxing), Parimarjan Negi (chess), Jhulan Goswami (cricket), Deepak Mondal (football), Sunil Chettri (football), Rajiv Tomar (wrestling), Sandeep Singh (hockey), Jasjit Kaur (hockey), Jajseer Singh (paralympics), Dinesh (kabaddi), Kapil Dev (volleyball), Rehan Poncha (swimming), Sanjeev Rajput (shooting).
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